
Prabandh Nagar Scheme: 18 साल से लंबित योजना को गति देने की तैयारी, किसानों के मुआवजे का नए सिरे से होगा आकलन और प्रस्ताव LDA बोर्ड में रखा जाएगा।
Lucknow: करीब 18 साल से अटकी लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की प्रबंध नगर आवासीय योजना को आगे बढ़ाने की तैयारी तेज हो गई है। योजना को धरातल पर उतारने के लिए एलडीए अब अधिग्रहित की जाने वाली जमीन का दोबारा सर्वे कराएगा। सर्वे के दौरान जमीन पर अतिक्रमण, पेड़ों और जल स्रोतों की स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके बाद किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे का कुल वित्तीय भार निर्धारित कर प्रस्ताव एलडीए बोर्ड की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
यह योजना सीतापुर-हरदोई रोड और आईआईएम रोड के पास लगभग 2,000 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित है। लंबे समय से मुआवजे को लेकर विवाद के कारण योजना आगे नहीं बढ़ पाई थी। अब दोबारा सर्वे और मुआवजे के आकलन से इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
2007 में जारी हुई थी योजना की अधिसूचना
प्रबंध नगर आवासीय योजना की अधिसूचना 13 सितंबर 2007 को जारी की गई थी। इसके तहत घैला, ककौली और अल्लूनगर डिगुरिया गांवों की करीब 3,350 बीघा जमीन का अधिग्रहण किया जाना था। योजना का उद्देश्य लखनऊ में आवासीय विकास को बढ़ावा देना है।
हालांकि, जमीन अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित मुआवजे की दर को लेकर किसानों ने विरोध किया था। उस समय किसानों को 2.57 लाख रुपये प्रति बीघा मुआवजा देने की पेशकश की गई थी। किसानों ने इसे अपर्याप्त बताते हुए आपत्ति जताई, जिसके बाद योजना की प्रक्रिया लंबे समय तक अटकी रही।
मुआवजे की दर बढ़ने से एलडीए पर बढ़ेगा वित्तीय भार
जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर विवाद के बीच कुछ किसानों और पर्यावरण से जुड़े लोगों ने भूमि अर्जन, पुनर्वास और पुनर्स्थापना प्राधिकरण (लारा) कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अदालत ने मुआवजे की दर में बड़ा इजाफा किया है। इसी वजह से अब एलडीए को योजना की वित्तीय व्यवहार्यता का नए सिरे से आकलन करना होगा।
मुआवजे की बढ़ी हुई दर के कारण प्राधिकरण पर कितना अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा, इसका आकलन दोबारा सर्वे के बाद किया जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव को एलडीए बोर्ड के सामने रखा जाएगा। बोर्ड की मंजूरी के बाद योजना को आगे बढ़ाने के संबंध में अगला कदम उठाया जा सकेगा।
जमीन, पेड़ और जल स्रोतों का होगा सर्वे
एलडीए की ओर से प्रस्तावित नए सर्वे में जमीन की मौजूदा स्थिति का विस्तृत आकलन किया जाएगा। इसमें अतिक्रमण, पेड़ों की संख्या और जल स्रोतों की स्थिति की जानकारी जुटाई जाएगी। सर्वे से जमीन की उपलब्धता और विकास कार्यों की संभावनाओं को समझने में मदद मिलेगी।
इसके आधार पर मुआवजे की कुल लागत और योजना से जुड़े अन्य वित्तीय पहलुओं का आकलन किया जाएगा। लंबे समय से लंबित इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
18 साल बाद योजना के आगे बढ़ने की उम्मीद
प्रबंध नगर योजना की अधिसूचना जारी होने के करीब 18 साल बाद भी जमीन अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े विवादों के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी है। अब एलडीए की नई पहल से योजना को गति मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, योजना का अंतिम स्वरूप, मुआवजे पर होने वाला कुल खर्च और विकास कार्यों की समयसीमा एलडीए बोर्ड के फैसले तथा आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। फिलहाल प्राधिकरण की प्राथमिकता जमीन का दोबारा सर्वे कराकर वित्तीय भार का आकलन करना है।
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