
Ex IAS Divya Mittal: उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल (Divya Mittal) के राजनीति में कदम रखने के ऐलान के बाद सूबे की सियासत गरमा गई है। हाल ही में नौकरी से इस्तीफा देकर अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने का वीडियो जारी करने वाली दिव्या मित्तल को लेकर अब नई अटकलें शुरू हो गई हैं।
प्रतापगढ़ के कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ ‘राजा भैया’ की पार्टी जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के एक वरिष्ठ नेता द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर की गई पोस्ट के बाद दिव्या मित्तल के इस दल से जुड़ने की संभावनाओं पर बहस छिड़ गई है।
जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के प्रदेश प्रधान महासचिव डॉ. बृजेश सिंह राजावत ने सोशल मीडिया पर दिव्या मित्तल का जिक्र करते हुए एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा कि राजनीति के कुरुक्षेत्र में दिव्या मित्तल का स्वागत है।
इस पोस्ट के वायरल होते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई। हालांकि, इन अटकलों और सोशल मीडिया पोस्ट्स के बीच दिव्या मित्तal ने पहले ही स्पष्ट किया था कि वह किसी बने-बनाए ढर्रे वाली पारंपरिक राजनीति का हिस्सा बनने के बजाय आम जनता के मुद्दों को सीधे उठाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
2024 लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल ने प्रतापगढ़ के कुंडा में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि अब राजा-रानी के पेट से नहीं, बल्कि ईवीएम के बटन से पैदा होते हैं। इस बयान के बाद राजा भैया की पार्टी ने मिर्जापुर समेत कुछ सीटों पर सपा को समर्थन दिया और जनता से अपने विवेक के अनुसार वोट करने की अपील की।
अनुप्रिया पटेल के बयान पर राजा भैया ने कहा कि अब राजा या रानी पैदा होना बंद हो गए हैं। ईवीएम से राजा नहीं, बल्कि जनसेवक और जनता का प्रतिनिधि पैदा होता है। उन्होंने कहा कि अगर ईवीएम से चुने गए लोग खुद को राजा समझने लगें, तो लोकतंत्र की मूल भावना हार जाएगी। जनता प्रतिनिधियों को क्षेत्र और जनता की सेवा का अवसर देती है, क्योंकि राजतंत्र पहले ही खत्म हो चुका है।
मिर्जापुर में दिव्या मित्तल जब बतौर डीएम तैनात थीं, तब एक सरकारी कार्यक्रम था। कार्यक्रम था मिर्जापुर के एक गांव में आजादी के बाद पहली बार पानी पहुंचाने का। इस कार्यक्रम में सभी उपस्थित थे। लेकिन अनुप्रिया पटेल मौजूद नहीं थीं। कहा जाता है कि अनुप्रिया पटेल को कार्यक्रम में शामिल होने का न्यौता नहीं मिला था। सूत्रों के मुताबिक इसी वजह से दिव्या मित्तल का ट्रांसफर कर दिया गया।
कहा जा रहा है कि दिव्या मित्तल ने जिस कर्मभूमि का जिक्र किया है, वह मिर्जापुर ही होगा। मिर्जापुर में रहते हुए दिव्या मित्तल ने कई अहम काम किए थे, जिससे जिले में उनकी लोकप्रियता बढ़ गई। आलम यह था कि जब दिव्या मित्तल का ट्रांसफर हुआ तो जिले के लोगों ने विरोध प्रदर्शन तक किए थे।
अब देखना दिलचस्प होगा कि वह राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल के साथ कोई गठजोड़ करती हैं या अपनी अलग राह पर कायम रहती हैं।
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