
MP Health Department: MP में डॉक्टरों की ड्यूटी पर सख्ती, समय पर अस्पताल पहुंचकर मरीजों का इलाज करना होगा अनिवार्य।
Bhopal: मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है। उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने साफ निर्देश दिए हैं कि स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की अनुपस्थिति और निर्धारित समय पर ओपीडी शुरू नहीं होने की स्थिति नहीं रहनी चाहिए। सभी डॉक्टर सुबह 9 बजे तक स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचकर मरीजों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराएं।
उप मुख्यमंत्री ने जबलपुर संभाग के जबलपुर, मंडला और नरसिंहपुर जिलों में पदस्थ बंधपत्र चिकित्सकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, चिकित्सकों की ज्वाइनिंग और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध सुविधाओं की समीक्षा की।
मंडला में 67 में से 50 डॉक्टरों ने संभाली जिम्मेदारी
समीक्षा के दौरान मंडला जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.जे. मोहंती ने बताया कि जिले में कुल 67 बंधपत्र चिकित्सक पदस्थ किए गए हैं। इनमें से 50 चिकित्सकों ने ज्वाइन कर अपनी सेवाएं शुरू कर दी हैं। उप मुख्यमंत्री ने शेष चिकित्सकों की ज्वाइनिंग की स्थिति की जानकारी लेने और सभी पदस्थ डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सुबह 9 बजे ओपीडी में बैठने के निर्देश
राजेन्द्र शुक्ल ने मंडला जिले के बीजाडांडी विकासखंड के ग्राम जमथर में पदस्थ चिकित्सक डॉ. आशीष पारस से सीधे बातचीत की। उन्होंने डॉक्टर से स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को मिल रही सुविधाओं और कार्यस्थल की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली। उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि चिकित्सक प्रतिदिन सुबह 9 बजे ओपीडी और अपने सेवा स्थल पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें, ताकि ग्रामीण मरीजों को इलाज के लिए इंतजार न करना पड़े।
डॉक्टरों को मिलेंगी बिजली, पानी और आवास जैसी सुविधाएं
संवाद के दौरान डॉक्टर ने स्वास्थ्य केंद्र में बिजली और पानी सहित बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं की जानकारी दी। इस पर उप मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने और समस्याओं का निराकरण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता के साथ उनके रहने, भोजन, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाओं का भी ध्यान रखना जरूरी है। बेहतर कार्यपरिस्थितियां मिलने से चिकित्सक ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक प्रभावी ढंग से सेवाएं दे सकेंगे।
मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने पर जोर
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख प्राथमिकता है। इसके लिए मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ एनीमिया नियंत्रण, सिकल सेल रोग की पहचान एवं उपचार और गैर-संचारी रोगों से संबंधित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी की जाए। सरकार का लक्ष्य है कि गांवों में रहने वाले लोगों को भी समय पर डॉक्टर, बेहतर उपचार और जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों।
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