
यूपी पंचायत चुनाव के लिए योगी कैबिनेट ने नई नियमावली 2026 को मंजूरी दी है। अब गांव में लगातार 6 महीने रहने वाले नागरिकों का नाम ही मतदाता सूची में शामिल होगा।
UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। अब राज्य के गांवों की वोटर लिस्ट (मतदाता सूची) में केवल उन्हीं लोगों के नाम शामिल किए जाएंगे जो संबंधित गांव में लगातार छह महीने से निवास कर रहे हैं। इस संबंध में 'उत्तर प्रदेश पंचायत राज (सामान्य निवास अवधारणा) नियमावली-2026' को योगी कैबिनेट ने अपनी मंजूरी दे दी है।
अभी तक पंचायत चुनाव की मतदाता सूची के लिए गांव में 'सामान्य निवास' की कोई स्पष्ट समय-सीमा या अवधि निर्धारित नहीं थी, जिसके चलते कई बार प्रशासनिक स्तर पर असमंजस और चुनावी विवाद की स्थिति पैदा होती थी। सरकार द्वारा इस नई नियमावली के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में सामान्य निवास की अवधि को स्पष्ट रूप से छह महीने तय कर दिया गया है।
अब पंचायत चुनाव में मतदाता बनने के लिए व्यक्ति को यह साबित करना होगा कि वह पिछले छह महीनों से लगातार उस गांव में रह रहा है। इसके लिए प्रमाण के तौर पर:
गांव के पते का आधार कार्ड
बिजली बिल या टेलीफोन बिल
अन्य वैध सरकारी दस्तावेज जमा करने होंगे।
उप्र पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा-9 की उपधारा-3 के तहत 'मामूली तौर से निवासी' (Ordinary Resident) व्यक्ति के निर्धारण को लेकर लंबे समय से अस्पष्टता थी। वर्ष 2015 के पंचायत चुनावों के दौरान मतदाता सूची में फर्जी या बाहरी लोगों के नाम जोड़ने को लेकर विवाद उठा था, जिसे बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट के 17 दिसंबर 2019 के निर्णय और उसके अनुपालन में वर्ष 2026 में पारित आदेशों के क्रम में इस नए नियम को कैबिनेट ने हरी झंडी दिखाई है। इस फैसले से:
पारदर्शिता: प्रदेश की ग्राम पंचायतों की मतदाता सूची के निर्धारण में स्पष्ट और विधिसम्मत आधार मिलेगा।
सटीक निर्णय: चुनावी अधिकारियों को तथ्यपरक निर्णय लेने में आसानी होगी।
कम होंगे विवाद: वोटर लिस्ट से जुड़े फर्जीवाड़े, स्थानीय विवाद और अदालती मुकदमों में भारी कमी आएगी।
इसके साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में काम जारी रखने की अनुमति देने वाले सरकारी आदेशों को सही ठहराया है। परिसीमन प्रक्रिया के साथ-साथ इस नई नियमावली के लागू होने से आगामी पंचायत चुनाव अधिक पारदर्शी और विवाद-रहित होने की उम्मीद है।
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