
अन्नकूट और गोवर्धन पूजा के दिन दोपहर 12:05 बजे बंद होंगे कपाट, पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मुखबा पहुंचेगी उत्सव डोली।
Uttarakhand News: उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अब समापन की ओर है। गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद करने की तिथि और शुभ मुहूर्त तय कर दिया गया है। आगामी 10 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 5 मिनट पर विधि-विधान के साथ मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद श्रद्धालु अगले छह महीने तक मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव में दर्शन कर सकेंगे।
गंगोत्री मंदिर समिति के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि मंगलवार, 10 नवंबर को अन्नकूट और गोवर्धन पूजा के शुभ अवसर पर अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:05 बजे गंगोत्री धाम के कपाट बंद किए जाएंगे। मंदिर समिति ने शारदीय नवरात्र की नवमी पर पूजा-अर्चना के बाद कपाट बंद करने की तिथि और समय निर्धारित किया।
कपाट बंद होने से पहले मंदिर में धार्मिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना और अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे। इसके साथ ही गंगोत्री धाम में इस वर्ष की यात्रा का समापन हो जाएगा।
कपाट बंद होने के बाद मां गंगा की उत्सव डोली पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मुखबा गांव के लिए रवाना होगी। मुखबा को मां गंगा का शीतकालीन प्रवास स्थल माना जाता है। सर्दियों में गंगोत्री धाम में मौसम प्रतिकूल होने के कारण श्रद्धालु मुखबा पहुंचकर मां गंगा के दर्शन करते हैं।
डोली यात्रा के दौरान स्थानीय धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है। इस प्रक्रिया के साथ मां गंगा की शीतकालीन पूजा और दर्शन की व्यवस्था मुखबा में शुरू हो जाएगी।
गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद भी श्रद्धालुओं के लिए मां गंगा के दर्शन का सिलसिला जारी रहेगा। अगले छह महीने तक भक्त मुखबा गांव में पूजा-अर्चना कर सकेंगे। सर्दियों के दौरान यह गांव मां गंगा के भक्तों के लिए प्रमुख धार्मिक स्थल बन जाता है।
चारधाम यात्रा के समापन के साथ ही उत्तराखंड के धामों में शीतकालीन परंपराओं का निर्वहन शुरू हो जाता है। अब श्रद्धालुओं की नजर गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने और मां गंगा की उत्सव डोली के मुखबा पहुंचने पर रहेगी।
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